









सादुलशहर पर श्री गौशाला की स्थापना स्वर्गीय सेठ मंगत राय दिलावर सत्संग वाले के अथक प्रयासों से हुई गौ सेवा परमो धर्म के मूल मंत्र को लेकर दिलावर जी ने गौशाला का पौधा लगाया वह पौधा आज वट वृक्ष का रूप ले चुका है जीवन के 70 बसंत में से 50 बसंत को सेवा को समर्पित करने वाले मंगत राय गोयल दिलावर का नाम सादुलशहर क्षेत्र में प्रमुख गौ सेवक के रूप में श्रद्धा से लिया जाता है सेवा का जज्बा उनमें पिता चौधरी शादी राम गोयल की पावन शिक्षाओं को लेकर की सेवा वर्तमान स्थल शिव वाटिका में शुरू की थी जिसमें बड़ी संख्या में गोवंश का पालन पोषण किया जाता था स्वर्गीय दिलावर आज की स्वार्थ भरी जिंदगी को तिलांजलि देकर अपने व्यक्तित्व व्यापारिक कार्यों को बाद में प्राथमिकता देकर गोवंश के कार्य को पहली प्राथमिकता देते थे गोवंश के प्रति ऐसी सच्ची लगन जो निस्वार्थ भाव से थी वह उनके जीवन चलती रही सेठ दिलावर के उस सपने को आज उसका परिवार साकार कर रहा है , उनकी पत्नी दर्शना देवी गोयल, पुत्र विजय गोयल व कपिल गोयल ने गौशाला में विभिन्न कार्य करवा दिलावर के भागीरथी प्रयासों से श्री गौशाला को स्थाई आशियाना 1973 में वर्तमान गौशाला के रूप में मिला। श्री गौशाला समिति के संस्थापक अध्यक्ष रहे 25 बीघा भूमि में गौशाला की स्थापना की गई, शासक प्रशासन के समक्ष गौशाला की भूमि के लिए सतत प्रयास किए।
दिलावर का हट
अपनों के लिए तो सभी जीते हैं जीना उसी का है जो मूर्ख पशुओं की सेवा के लिए जिए ऐसे ही भाव लेकर गोवंश बाबू पशुओं के आशियाने को लेकर उनका हट वास्तव में साधुवाद का पात्र हैं जिन्होंने करीब 20 वर्षों तक सिर के केश तब तक नहीं कटवाने का संकल्प लिया जब तक गौशाला को स्थाई आशियाना मिलना जावे नहीं कटाएं आखिर उनके सपनों पर लगे वह उनका पावन मिशन सफल हुआ गौशाला को सन 1973 में स्थाई आशियाना मिला गोवंश की सेवा में उनकी आवाज बंद हुई तथा गोवंश का कारवां क्षेत्रवासियों के सहयोग से निरंतर बढ़ता गया
श्री मंगतराई दिलावर का गौशाला विकास यात्रा के साथ देने वाले होशियार सिंह यादव कल चंद्र वर्मा मूलचंद बिहारी हेतराम नोई बलदेव राज मित्तल चंद्र सिंह जोड़ा व जसकरण सिंह प्रमुख थे जिन्होंने हरा चारा इकट्ठा करना व प्रशासन से मंजूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की

मंगतराई दिलावर द्वारा इस कार्य को पूर्ण करने के लिए सन 1973 में गर्म वस्त्र त्याग कर दिए व सूती वस्त्र जीवन धारण किए 20 साल तक सिरके केस नहीं कटवाए मंगतराई दिलावर के साथ 25 साल तक जयपाल माली प्रदेश में भी साथ निभाया दिलावर के तीन पुत्रियां सरोज गोयल सतीश अग्रवाल हनुमानगढ़ किरण गोयल प्रवीण गर्ग चंडीगढ़ गोयल नीरज गर्ग चंडीगढ़ पुत्र विजय गोयल अंजु गोयल सादुलशहर पुत्र क पी गोयल सीमा गोयल दिल्ली जिन्होंने भी सेठजी का साथ दिया उन्हीं के बदौलत यह सेठ जी का सपना साकार हुआ गोकुल नवर्याला का निर्माण कार्य पूरा हुआ सेठ जी दुनिया में नहीं है परंतु फिर भी उनकी आंखें गौशाला समिति की तरफ ही लगी रहती है
श्री गौशाला सादुल शहर में उत्तर दिशा में सादुलशहर देव खेड़ा मार्ग परम मुख्य बस स्टैंड से करीब आधा किलोमीटर दूरी पर 25 बीघा पर विशाल में भव्य भवन में संचालित है गौ सेवा से बढ़कर कोई पुनीत कार्य नहीं है इसी पावन भाव को लेकर स्थापित श्री गौशाला इस क्षेत्र में अपनी अमिट छाप स्थापित किए हुए हैं गोसेवा प्रति क्षेत्र वासियों का जज्बा वास्तव में सराहनीय है श्री गौशाला समिति का भव्य भवन गौ सेवा का दृढ़ संकल्प किए आसपास के शहर के लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है
सादुल शहर का इतिहास
राजस्थान क्या यह सादुल शहर पंजाब सीमा से सटा हुआ है तथा पाकिस्तान की सीमा से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर है शहर कालांतर में एक छोटा सा
गांव मटीली था सन 1921 में बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह के अथक प्रयासों से मंडी अस्तित्व में आई इस मंडी का नाम सादुल शहर बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के पुत्र सादुल सिंह ऊपर पड़ा सन 1927 में सादुल शहर को वाया कैनाल लूप लाइन से जोड़ा गया सन 1955 में भाखड़ा नहर के आने से यहां हरित क्रांति आई व कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई गौरतलब है कि मंडी को श्रीगंगानगर वन संगरिया मंडी से पहले बसाने का सौभाग्य प्राप्त है इस मंडी में कालांतर में चारों और मिट्टी के डिब्बे नजर आते थे पूरे दिन मिट्टी की मिट्टी उड़ा करती थी आलम यह था कि धूल भरी अंधेरिया कई दिनों तक चला करती थी रेलवे स्टेशन के निकट एक बहुत बड़ा डब्बा हुआ करता था उस समय चने व का कस्बे का नाम मटीली पड़ा वह विकास के स्वपन तय करते हुए मटीली से सादुलशहर बना अटेली से सादुलशहर का सफर तय करते समय इस कस्बे ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं सादुल शहर में एसडीएम कार्यालय तहसील कार्यालय मूषक मजिस्ट्रेट न्यायालय राजकीय महिला महाविद्यालय नगरपालिका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 132kv जी भव्य बस स्टैंड सहित विभिन्न राज्य के कार्यालय हैं